लोकडाउन 4.0 में क्यों 20% – 35% तक बढ़ा ट्रकों का भाड़ा?

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लोकडाउन 4.0 में तकरीबन सभी उद्योगों में ट्रक भाड़े में 20%-35% की बढ़ोतरी देखी गई है। जैसे कि:

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (AIMTC) के अध्यक्ष के मुताबिक, “अभी के समय पुणे से दिल्ली अंगूर ला रहे एक ट्रक का भाड़ा पहले के 70,000 रुपए के मुकाबले 90,000 रुपए हो गया है, क्योंकि वापसी में ले जाने के लिए सामान नहीं मिल रहा है”।

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (IFTRT) के कॉर्डिनेटर एस.पी. सिंह के मुताबिक, “नाशिक-दिल्ली आमों की आवाजाही वाली लेन का एक तरफ का भाड़ा 45,000 रुपए से बढ़कर 75,000 रुपए हो गया है”।

हमने उद्योग से जुड़े विभिन्न लोगों से इस बढ़ोतरी के पीछे के कारणों के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की। पढिये क्या हो सकते हैं बढ़त के मुख्य कारण:

  • वापसी में लोड का ना मिल पाना भाड़ा बढ़ने का सबसे मुख्य कारण है।
  • लोकडाउन के पहले 3 चरणों में ट्रकों के खाली खड़े रहने से जो नुकसान हुआ, हो सकता है उसकी भरपाई के लिए ट्रक मालिक ज्यादा भाड़ा ले रहे हों।
  • एक अंदाज़े के मुताबिक अब भी कुल 52 लाख माल वाहनों में से सिर्फ एक तिहाई ही सड़क पर दौड़ रहे हैं, अधिकांश अब भी खाली ही खड़े हैं। भाड़ा बढ़ाने से ट्रक मालिकों को खाली खड़े ट्रकों से हो रहे नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल रही है।
  • ट्रक के खराब होने की स्थिति में मरम्मत की सुविधा अभी आसानी से नहीं मिल पा रही है – ऐसे खराब ट्रक से भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
  • समय पर ट्रक ड्राइवरों का न मिल पाना भाड़ा बढ़ने के सबसे मुख्य कारणों में देखा जा रहा है। टैक्सी चालक कंपनियों की ही तरह, मल्टी एक्सल ट्रक को चलाने के लिए भी खास तरह की स्किल वाले ड्राइवरों की जरूरत होती है। क्योंकि आजकल ड्राइवर इतने आसानी से नहीं मिल पा रहे हैं, इसलिए ड्राइवरों को काम पर बुलाने के लिए ज्यादा तनख्वाह देनी पड़ रही है। प्रवासी मज़दूरों के वापिस घर लौटने से ड्राइवर की कमी की समस्या और बढ़ गई है।
  • बड़ी कंपनियां, जैसे ई-कोमर्स एवं बड़ी निर्माता कंपनियां, आमतौर पर ट्रांसपोर्टरों के साथ सालाना कॉन्ट्रैक्ट करती हैं जिसके तहत भाड़े बदले नहीं जा सकते हैं। संभव है कि ऐसी कंपनियों से होने वाले नुकसान की भरपाई ट्रांसपोर्टर अन्य कंपनियों से ज्यादा भाड़ा वसूल कर रहे हों
  • ड्राइवरों को सैनिटेशन एवं बचाव के उपकरण प्रदान करने के लिए होने वाले अतिरिक्त खर्चे को भी हो सकता है ट्रक मालिक भाड़े में शामिल कर रहे हों।

जहां भाड़े में आई इस बढ़त से निश्चित ही उद्योगों पर असर पड़ रहा होगा, ऊपर लिखे कारण ऐसा होने की उचित वजहें जान पड़ते हैं। बीते 2 महीनों में ट्रक मालिकों और ड्राइवरों को एक बेहद मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा है और उनके पास भाड़े में इस तरह की बढ़ोतरी के अतिरिक्त शायद कोई विकल्प नहीं बचा हो।

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